अंगूठा हूं मैं एक / ऊंगलियां चार / मिले सब हथेली हो गई तैयार / दसों से करता हूं कीबोर्ड पर वार / कीबोर्ड ही है अब मेरे लिखने का हथियार जब बांध लिया तो बन गया मुक्‍का / सकल जग की ताकत है अब चिट्ठा।

फर्जी डॉक्‍टरों के विरोध में समाज को एकजुट होना होगा : छद्मछलिया डॉ. आर के अग्रवाल की जांच भारत सरकार के सभी विभाग यथा मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया, इंकम टैक्‍स ऑफ इंडिया इत्‍यादि को जनहित में तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए

>> शनिवार, 6 अगस्त 2011


किसी को दो, न दो, पर इन्‍हें भारत रत्‍न जरूर दो
फर्ज

18 जुलाई 2011 दिन रविवार एक चैनल पर डॉ. आर के अग्रवाल का साक्षात्‍कार देख रहा हूं। एकाएक आशा की किरण नजर आती है। डॉ. साहब पीतमपुरा दिल्‍ली में हैं और कुख्‍यात व्‍याधियों जैसे हेपिटाइटिस सी की चिकित्‍सा होम्‍योपैथी पद्धति से करते हैं। तभी इनके कार्यालय के फोन नंबर पर बात करके समय तय करता हूं सांय 7 बजे का और अपनी धर्मपत्‍नी के साथ घर से अपनी कार में अपनी सारी केस हिस्‍ट्री के साथ चल देता हूं। वहां पहुंचकर डॉक्‍टर साहब अपने चैम्‍बर में अपने लैपटाप में व्‍यस्‍त हैं और कनखियों (यह मुझे बाद में याद करने पर महसूस हो रहा है) से बाहर रिसेप्‍शन पर निगाह भी रख रहे हैं। पहुंचते ही रजिस्‍ट्रेशन कराने के लिए कहा जाता है और रुपये 500 की मांग परंतु मेरे यह कहने पर कि मुझे तो हेपिटाइटिस सी है तो कन्‍सल्‍टेशन फीस दोगुनी हो जाती है मतलब 1000 रुपये।  चिकित्‍सा होम्‍योपैथी पद्धति से और कन्‍सल्‍टेशन सिर्फ एक हजार रुपये। मैं एक हजार रुपये जमा कर देता हूं और बदले में मिलता है एक कार्ड। मेरी मरीज आई डी 5929 है। अब मुझे नंबर बना दिया गया है।

इस प्रक्रिया में समय लगता है आधा घंटा क्‍योंकि बीच बीच में बाहर से फोन आ रहे हैं और रिसेप्‍शनिस्‍ट उन्‍हें प्रमुखता दे रही है। बहरहाल, आधे घंटे बाद मैं अपने कागजातों, एक्‍सरे, रिपोर्ट्स, फाइबरस्‍कैन (जो पिछले साल के अंतिम महीनों में इंस्‍टीच्‍यूट ऑफ लीवर एंड बायलरी साइंसिज, डी 1, वसंत कुंज, नई दिल्‍ली 110070 में करवाए थे) के साथ डॉक्‍टर के चैम्‍बर में दाखिल होता हूं। वे किसी रिपोर्ट को नहीं देखते और न किसी एक्‍सरे, फाइबरस्‍कैन की रिपोर्ट को, बस सीधे पूछते हैं कि क्‍या तकलीफ है, मैं बतलाता हूं कि मोशन समय पर नहीं आता है। जिससे दिन भर बेचैनी रहती है और हेपिटाइटिस सी बतलाया है, उसकी चिकित्‍सा कराना चाहता हूं। साथ ही यह भी बतला देता हूं कि सन् 2005 में मेरे गाल ब्‍लैडर में स्‍टोन था, लेकिन अपोलो अस्‍पताल, दिल्‍ली में मामला बिगड़ गया और 32 दिन सामान्‍य और 8 दिन आई सी यू में भर्ती रहने के बाद मेरा वजन 78 किलो से घटकर 53 किलो हो गया परंतु गाल ब्‍लैडर की चिकित्‍सा नहीं हुई अपितु पैंक्रियाज में सिस्‍ट हो गया। जिसे 2005 सितम्‍बर में गंगाराम अस्‍पताल में डॉ. प्रदीप चौबे जी ने मिनिमम एसेस सर्जरी से रिमूव किया है।
डॉ. अग्रवाल की सहज प्रतिक्रिया थी कि गाल ब्‍लैडर की पथरी के लिए उसे रिमूव करने की जरूरत ही नहीं होती है। वो तो हमारी दवाईयों से क्‍योर हो जाता है। मैंने कहा कि आपके बारे में जानकारी तो सबके पास पहुंचनी चाहिए। मैं सरकारी कर्मचारी होने के साथ ही एक लेखक भी हूं और मेरी रचनाएं देश भर के अखबारों और इंटरनेट पर प्रकाशित होती हैं।


उन्‍होंने मेरे नाम का एक कार्ड बनाया और उस पर एक एस्‍टीमेट खाका तैयार किया जिसमें चार या पांच दवाईयों के नाम लिखे और कहा कि आपको 15200 रुपये महीने की दवाईयां कम से कम तीन महीने तक लेनी होंगी। मैंने कहा कि क्‍या आपको सीजीएचएस से मान्‍यता है, वे बोले मालूम नहीं पर मरीज बिल ले जाते हैं और वे क्‍लेम करते ही होंगे। मैं तो 15200 रुपये की राशि देखकर ही चौंक गया था, यही हाल मेरी श्रीमतीजी का भी था। मैंने कहा इस बारे में मुझे सोचना होगा क्‍योंकि इतनी राशि तो मैं फिलहाल खर्च नहीं कर पाऊंगा।
आप कुछ रियायत बरतें तो मैं आपका और आपके बारे में इंटरनेट पर प्रचार कर दूंगा तो वे बोले कि इसमें हम कोई मोल भाव नहीं करते हैं। आप कुछ लिखेंगे तो मैं उसके लिए आपको पेमेन्‍ट कर दूंगा।

अब उन्‍होंने कहा कि आप सिर्फ दो दवाईयां शुरू कर सकते हैं जिन पर 4600 रुपये महीने की दवाई का खर्चा आएगा और आपकी बीमारी बढ़ेगी नहीं। फिर बाद में आप पूरी दवाई शुरू कर सकते हो। मैं मान गया और क्रेडिट कार्ड से पेमेन्‍ट कर दी, बिल मांगा और दवाई ली उसके खाने का तरीका छपा हुआ साथ में मिला। फिर मैं घर चल दिया। परंतु बिल लेना भूल गया और शायद ये ही वे चाहते भी थे।

घर पहुंचकर जब बिल के बारे में याद आया तो उनके रिसेप्‍शन से कहा गया कि आकर ले जाओ। मैंने कहा कि मैं नेहरू प्‍लेस के पास रहता हूं जो काफी दूर है और बार बार आना संभव नहीं है। आप बिल और एक 15 दिन का बैड रेस्‍ट का सर्टीफिकेट बनाकर कूरियर से मेरे पते पर भेज दें। उन्‍होंने हामी भर ली। जबकि कई बार संपर्क करने पर दो सप्‍ताह बाद कूरियर से बिल मिला। बैड रेस्‍ट के लिए उन्‍होंने साफ मना कर दिया, कहा कि आप यहां पर आकर हस्‍ताक्षर करके ले जाओ।

मुझे परसों 4 तारीख तक लगातार दवाईयां खाने से कोई फर्क नहीं दिखा बल्कि दवाई का रिएक्‍शन नीचे की तरफ तीन चार दर्दभरे फोड़ो के रूप में महसूस हुआ। जिससे मुझे बैठने में भी परेशानी हो रही है। मैंने पर्चे के अनुसार दवाई लेने के बाद रात को तीन बजे उठकर नींद भी खराब की है। मैंने डॉक्‍टर साहब को फोन किया तो उन्‍होंने कहा कि आप आकर दिखला दो। मेरी दवाईयों से ऐसा रिएक्‍शन नहीं होता है। पर मैं वहां नहीं जा पाया। तभी मुझे आज नवभारत टाइम्‍स अखबार में उनका एक विज्ञापन नजर आया। यह तो सीधे से मरीजों को छलने वाला उपक्रम था।
आश्‍चर्य की बात यह है कि देश के महत्‍वपूर्ण अखबार बिना उनकी सच्‍चाई जाने सिर्फ कुछ धन के मोह में उनके विज्ञापन प्रकाशित कर रहे हैं और इसी प्रकार कुछ चैनल उनके वीडियो को लाइव रिकार्डिंग के नाम पर प्रसारित कर रहे हैं।

सारा मामला आपके सामने है। आप मुझे इस बारे में राय दीजिए कि मुझे क्‍या करना चाहिए, जो साथी डॉक्‍टर आर के अग्रवाल से उनका पक्ष जानना चाहें, वे उन्‍हें फोन भी कर सकते हैं।
उनके दिए हुए बिल में टिन नंबर नहीं है। उनकी दवाई की बोतलों पर निर्माता कंपनी का पता, तारीख, एक्‍सपायरी, किन घटकों का मिश्रण है, इत्‍यादि मूलभूत जानकारी भी नहीं है। यह आप बोतलों के चित्र में देख सकते हैं।
आप बतलायें कि मुझे क्‍या करना चाहिए ?

44 टिप्पणियाँ:

राज भाटिय़ा 7 अगस्त 2011 1:41 am  

अब आप ने क्या करना, उस ने तो कर दिया, अब पुलिस मे जाओ कोई नही सुनेगा, सब से अच्छा हे आप दिनेश जी से राय ले वो ही सही राय देगे,

Ratan Singh Shekhawat 7 अगस्त 2011 7:02 am  

बाप रे ! ये तो खुले आम ठगी है ,होम्योपेथी में इतनी महंगी दवाएं तो पहली बार पढ़ी है |
इस सिलसिले में दिनेश जी ही कोई क़ानूनी राय दे सकते है|

Ratan Singh Shekhawat 7 अगस्त 2011 7:03 am  

मैं आपका और आपके बारे में इंटरनेट पर प्रचार कर दूंगा तो वे बोले कि इसमें हम कोई मोल भाव नहीं करते हैं। आप कुछ लिखेंगे तो मैं उसके लिए आपको पेमेन्‍ट कर दूंगा।

@ अब डा.साहब का असली वाला प्रचार हो गया उन्हें लेख का बिल भेज दीजिये|

Insight Story 7 अगस्त 2011 9:45 am  

अविनाश जी सबसे पहले आपके उत्तम सवास्थ्य के लिए शुभकामनाएं. कल मैंने एक पोस्ट नवभारत टाइम्स पर लिखा है. ये वो डाक्टर हैं जो डाक्टरी खरीद रहें हैं. चोरबाजारी से डिग्री खरीदने वाले इन डाक्टरों से क्या उम्मीद की जा सकती हैं. इन्हें बेनकाब करें. और इसे भी पढ़ायें अपने सुधि दोस्तों को.
http://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/insightstory/entry/%E0%A4%A1-%E0%A4%95-%E0%A4%9F%E0%A4%B0-%E0%A4%AC-%E0%A4%95-%E0%A4%B0%E0%A4%B9-%E0%A4%B9-%E0%A4%96%E0%A4%B0-%E0%A4%A6-%E0%A4%B2

friend to all 7 अगस्त 2011 12:14 pm  

sriman ji do batein hain
1 poore vakye ko sabke samne aap laye yeh apki bahduri hai.
2 aap in sab batoon ka sikar bane to bewkoofi bhi aapki hai
jab apko maloom hai ki apki beemari hepatitis c hai to treatment bhi aapko malum hona chaihye alloppathy mein chronic hepatitis c ke liye anti-viral medicine hai. is case jab apko malum hai ki medicine ke manufacture ka pata nahi contents ka pata nahi to aapne yesi medicine li hi kyun ab meri salah apko hai ki police me report ki jiye aur drug controller ke paas un davaiyon ka sample bhejiye ho sakta hai usme kuch aisa ho jo apko nuksan pahucha de.

प्रवीण पाण्डेय 7 अगस्त 2011 1:41 pm  

कोई तो रोक लगाये, इन पर।

अविनाश वाचस्पति 7 अगस्त 2011 2:06 pm  

मेरी आपबीती क्‍या यहीं पर नहीं रूक सकती कि और किसी के साथ कभी ऐसा न हो। इसके लिए लिंक में दी गई पोस्‍ट को अपने ब्‍लॉग/वेबसाइट/पत्र एवं पत्रिका में प्रकाशित कर मुझे हौसला प्रदान कीजिए

इन फर्जी डॉक्‍टरों से समाज को मुक्ति कैसे मिलेगी

वन्दना 7 अगस्त 2011 2:25 pm  

अविनाश जी इसके लिये तो आप सबसे पहले दिनेश जी से ही राय लीजिये और उसके बाद अगर जरूरत समझे तो उपभोक्ता फ़ोरम मे जाये या मेडिकल काउंसिल मे उनके लिये शिकायत दर्ज कराये शायद तभी कुछ हो सकेगा। आजकल ऐसे ही विज्ञापन देकर ठगी की जाती है।

mark rai 7 अगस्त 2011 2:43 pm  

aise logon ke khilaaf safai abhiyaan chalaya jana chahiye...sadako par jhaaduu aur dande lekar niklna chahiye...janta ka dabaaw inhe aur inke jaise hamdardon ko thik kar dega.........

eSence 7 अगस्त 2011 2:50 pm  

चाचा जी, कुछ कहते हुए नहीं बन रहा है, अभी इन्के क्लिनिक फोन लगाय था, कल सुबह बात करने के लिये कहा है। आपको कल बताती हूं कि क्या कर सक्ते हैं, इस मामले मे, फोन पर बात करने के बाद ही कुछ कह सकुंगी।

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" 7 अगस्त 2011 2:56 pm  

श्रीमान जी, आप मेरे गुरुवर श्री दिनेश राय द्विवेदी जी से सलाह लें. वैसे आपने यह पोस्ट लिखकर अन्य लोगों को सचेत जरुर किया है. मगर आप जितनी पहुँच वाले व्यक्ति के पहले कार्यवाही करनी चाहिए थी फिर लोगों उसकी सूचना देनी चाहिए. आपके पास इतने अवार्ड है. उनमें से किसी अवार्ड देने वाली संस्था को दो-चार फोन करके उस डाक्टर का बोरिया-बिस्तरा बंधवा सकते हैं आप. फिर भी मुझे आपकी पीड़ा का खेद है.

Atul Shrivastava 7 अगस्त 2011 3:00 pm  

गांवों में तो झोला छाप डाक्‍टरों का गरीब ग्रामीणों को इलाज के नाम पर लूटने के किस्‍से तो सुने थे पर देश की राजधानी में भी ऐसा गोरखधंधा पनप रहा है....ये जानकर आश्‍चर्य हुआ।
पुलिस में इनके खिलाफ मामला दर्ज कराना चाहिए आपको.....

Kajal Kumar 7 अगस्त 2011 4:00 pm  

टी.वी. चैनल और ये डाग्दर बाबू कहीं 'एक दूसरे की पीठ खुजाए क्लब' के सदस्य तो नहीं :)

रवीन्द्र प्रभात 7 अगस्त 2011 4:20 pm  

ऐसे ठगों के बारे में पूरी पड़ताल जरूरी है, वैसे दिनेश जी से कानूनी सलाह लेकर उस ठग के विरुद्ध कदम उठाना आवश्यक होगा !

सुशील बाकलीवाल 7 अगस्त 2011 4:21 pm  

होम्योपेथी में उपचार के नाम पर ऐसी लूट ? इससे तो अच्छा होता कि आप इनके सेवाशुल्क सुनकर ही किसी एलोपेथिक पद्धति से अपना उपचार करवा लेते । अब तो श्री दिनेशरायजी ही इनकी इस लूट-खसोट को बन्द करवा सकने की शायद कोई सही राह सुझा सकें ।

vedvyathit 7 अगस्त 2011 8:11 pm  

phle to khob shubhkamnaye mitrta divs ki
aap ko is ke khilaf jroor court jana chahiye

सुभाष नीरव 7 अगस्त 2011 8:48 pm  

अविनाश भाई, सबसे पहले तो यही कामना करता हूँ कि आप जल्द स्वस्थ हों ! इस खुली लूट का हम सबको विरोध करना चाहिए… यह तो इन डाक्टरों की खुलेआम लूट है… अच्छ किया आपने यह पोस्ट लगा कर दूसरों को भी सचेत कर दिया।

beena 7 अगस्त 2011 9:40 pm  

सबसे पहले तो आप अपने स्वास्थ्य की जांच करवाएं | इतनी तकलीफ में रहने की जरूरत नही है | मैं तो विश्वास ही नहीं कर पा रही हूँ कि आप जैसा समझदार व्यक्ति गलत हाथों में कैसे पद गया?खैर अब तो उपाय ही बाकी है|
मैंने अपने बेटे को आपका केस बताया उसका माननाहै व्यक्ति को सही इलाज के लिए सही डाक्टर के पास ही जाना चाहिए आप चाहे तो वरुण से अपने इलाज के सन्दर्भ में मिल सकते हैं वह एम्स में ही है और आर्थो विभाग में है |

Sushil 7 अगस्त 2011 9:59 pm  

अपने ईलाज पर ध्यान दीजिये । आश्चर्य है आप कैसे इन सब के चक्कर में पड़ गये?

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी 7 अगस्त 2011 10:10 pm  

मैं भी कहूँगा कि आप सिरफिरा-गुरु की सलाह लेवें!

आर. अनुराधा 8 अगस्त 2011 9:05 am  

इसके खिलाफ लिखना कहना जरूरी है। लेकिन साथ ही एक सबक भी- कि हम शॉर्टकट और शर्तिया इलाज के झोल में फंस कर ऐसे नींम हकीमों से इलाज करवाते हैं और पछताते हैं। इन डॉक्टरों के पास न कुद जाएं और न दूसरों को सलाह दें। बल्कि जो ऐसी बातें करें, उन्हें भी हतोत्साहित करें कि धोखे के फेर में पड़ने न जाएं।

राजीव यमुनानगरवासी 8 अगस्त 2011 10:03 am  

गुरू जी को चरण स्‍पर्श प्रणाम आपका स्‍वास्‍थ्‍य ठीक रहे इसके लिए मंगल कामना करता हूं, पुलिस में एफ आई आर दर्ज करवायें और यमुना नगर जरूर आएं यहां अच्‍छे होम्‍योपैथिक डाक्‍टर हैं


प्रणाम

Rajesh Sharma 8 अगस्त 2011 12:27 pm  

होम्योपेथी, आयुर्वेद सर्वमान्य और सक्षम चिकित्सा पद्धतिया हैं / अगर हम साइड एफ्फेक्ट्स के सन्दर्भ में ले तो एलोपेथिक चिकित्सा पद्धति से ये बेहत्तर हैं / लेकिन इनका भी व्यवसायीकरण हो रहा हैं / कुछ बहुत अच्छे डॉक्टर भी हैं जो आज भी समाज सेवा के लिए काम करते हैं / अविनाश जी आपने बिलकुल सही किया ये लेख प्रकाशित करके , इसकी एक प्रति डॉक्टर साहब को भेज दीजिये / धन्यवाद

Pavitra_Hyd 9 अगस्त 2011 11:45 am  

Hamare hyderabad me bhi bilkul yahi isthiti hai .sachar patron me bade bade vigyapan,paid news se bhramit log...jigyasavash ek bar ham bhi gaye the ,loot ki halat yahi thi .aapne is ko sab ke samane la kar achcha kiya hai .
pavitra agrawal

Pavitra_Hyd 9 अगस्त 2011 11:51 am  

Hyderabad me bhi samachar patro me is tarah ke vigyapano ki bharmar hai.Ab to unka prachar karate huye paid news bhi aane lagi hai .Ham log bhi ek bar bas jigyasavash gaye the par loot ke jhamele me bina fanse laut aaye the.aapne is bat ko sab ke samne lane ka prayas kiya yah bahut achchi bat hai.
pavitra agrawal

balkishan 10 अगस्त 2011 10:21 am  

अविनाश जी आप लुटेरो के पास चले गए थे आजकल इन्हें भगवानकौन कहेगा डॉक्टर कापेशा नोट छपने की मशीन बन कर रह गया है हमे इनसे सावधान रहना छाए आप का लेख एक कडवे सच को उजागर करता है

सुभाष चंदर 10 अगस्त 2011 5:57 pm  

had hai saheb..mujhe to us admi kie doctor honre par bhi shak hai.

नुक्‍कड़ 10 अगस्त 2011 9:16 pm  

E mail recd.
2011/8/7 kiran arora
avinash ji .... namaskar... maine laptop toh on kiya tha aap se ye puchne ko ki hindi type ke liye kaun se key punch karne hai...uc din ke baad translation & kuch aur likhne me samay hi nahi mila hindi me kuch type karne ka...lekin net par aapka mail pada... ye toh wakai chinta ki baat hai...par afsos kuch hota nahi...navbharat times mein upbhokta jagrookta ke liye maine saikdo article likhe...aise logo ke khilaf bhi....par hamara system itna corrupt ho chuka hai ki kahi kuch sudhar ki umeed nahi dikhti...itne saal ho gaye....consumer act bane...par aise log aaj bhi falfool rahe hai.. inko pardafash kar sahi kiya aapne....kam se kam kuch log toh savdhan honge....baharhaal doston ko toh aapki sehat ki chinta hai....mitrata diwas par kamna hai ki prabhu aapko sehatmand banaye...ab sehat kaisi hai...? naturopathy walo ke yaha zara pata kar hi jaye...kahi waha bhi jeb toh kat jaye... par sehat par asar na pada toh ye toh dohra nuksan hoga,,,

नुक्‍कड़ 10 अगस्त 2011 9:21 pm  

Jin kisi mitra ke pass
Medical council of india ki e mail par is mamle ko bhejne ka kasht karen.
Aur jahan jahan is mamle ko bheja ja sakta ho, bhejen. Commissioner of police ko do din pahale e mail bheji ja chuki hai.

अविनाश वाचस्पति 11 अगस्त 2011 1:56 pm  

मीडिया दरबार में भी खबर



ठग शिरोमणि डॉक्टर आर के अग्रवाल की ठगी प्रोमोट करने में लगे हैं अख़बार और न्यूज़ चैनल

बी एस पाबला 11 अगस्त 2011 8:21 pm  

जब तक यह किसी की सरपरस्ती में रहेंगे तब तक कोई क्या कर लेगा?
फिर भी एक झटका ज़रूरी है ऐसे लोगों को

टीवी, अखबार, डॉक्टर
सबके खिलाफ
उचित कार्यवाही की जाए

जाट देवता (संदीप पवाँर) 11 अगस्त 2011 11:34 pm  

तो ये था आपके वजन घटने का असली राज, अब जान गया हूँ।

ब्लॉ.ललित शर्मा 12 अगस्त 2011 10:13 am  

फ़र्जी डॉक्टरों ने गदर मचा रखा है, लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। मरीजों को दोनो हाथों से लूट कर जेब भर रहे हैं। सरकार इन पर कार्यवाही नहीं करती इसलिए धड़ल्ले से इनके धंधे चल रहे है। कार्यवाही के साथ इनकी छित्तर परेड़ भी होनी चाहिए।

अविनाश वाचस्पति 12 अगस्त 2011 5:20 pm  

पुलिस कमिश्‍नर, दिल्‍ली से प्राप्‍त ई मेल संदेश पेश है :

bk gupta via nic.in to jtcp-nr-dl, me

show details 12:26 PM (4 hours ago)

from bk gupta bk.gupta@nic.in via nic.in
to Avinash Vachaspati
cc jtcp-nr-dl
date Fri, Aug 12, 2011 at 12:26 PM
subject Re: एक शिकायत : क्‍या यह डॉक्‍टर असली हैं
mailed-by nic.in
Important mainly because it was sent directly to you.

hide details 12:26 PM (4 hours ago)


Dear Citizen,

Thanks for your E-mail. Your E-mail has been acknowledged by Commissioner of Police, Delhi and the same has been referred to the Joint Commissioner of Police/Northern Range for further necessary action and your reference No.is 7674/E-mail dated 08/08/2011. You may contact him on telephone No. 23490010 Extn 4278 and his e-mail ID is jtcp-nr-dl@nic.in.

jtcp-nr-dl@nic.in

अविनाश वाचस्पति 12 अगस्त 2011 9:16 pm  

विस्‍फोट डॉट कॉम पर प्रकाशित खबर का लिंक
पीतमपुरा वाले डकैत डॉक्‍टर साहब

anita agarwal 17 अगस्त 2011 7:38 pm  

aapne to unka prachar ker diya. ab unke kathnanusaar bil bhej dijiye. waisae homoeopathic medicines mehngi nahi ati hain per dr.s apni fees ya expertise ka lete hain... lekin ye to andhergardi hai...

कौशलेन्द्र 19 अगस्त 2011 6:54 pm  

भाई वाचस्पति जी ! प्रथमतः आप NIROCYL और LIV 52 HB में से प्रत्येक की २-२- गोलियां सुबह-शाम लेना शुरू कर दें. एवं ०९४२४१३७१०९ पर संपर्क करें. हिपेटाटिस एक वायरस जन्य व्याधि है. बडे धैर्य से औषधि सेवन करें. जिस डॉक्टर का आपने उल्लेख किया है वह डॉक्टर नहीं है, उसके पास चिकित्सा सहायक की योग्यता का मात्र डिप्लोमा प्रमाणपत्र है. कुछ वर्ष पूर्व शासन के आदेश से हमने ऐसे डॉक्टर्स के प्रमाणपत्रों की छान-बीन की थी और उन्हें फर्जी पाया था. शासन को रिपोर्ट भेजने के कुछ समय बाद इनके हौसले और भी बुलंद हो गए. कुछ डॉक्टर्स ने तो पहले से करीब आठ गुने बड़े साइज़ के साइन बोर्ड बनवा के टांग लिए जो अब हमें चिढाते हैं. उनका तो कुछ नहीं बिगड़ा हमारी कई डॉक्टर्स से दुश्मनी हो गयी. बाद में पता चला कि हमारे क़ानून में उनके खिलाफ कोई धारा ही नहीं है . हाँ आप ठगी और दवा की वास्तविक मूल्य से अधिक कीमत वसूलने का केस कर सकते हैं. ऐसे डॉक्टर्स पर शासन का कोई नियंत्रण नहीं है वे आपके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने के लिए स्वतन्त्र हैं.
आपसे फीस और दवा की कीमत दोनों ही ज्यादा वसूली गयी हैं. एलोपैथिक दवाओं की अपेक्षा अन्य चिकित्सा पद्यतियों में कॉम्प्लीकेशन्स और साइड इफेक्ट्स न के बराबर हैं ...कुछ ठग लोग इसी का फ़ायदा उठाते हैं.

सुनीता शानू 21 अगस्त 2011 10:25 am  

आप भी चले आयें ब्लॉगर मीट में नई पुरानी हलचल

सतीश सक्सेना 23 अगस्त 2011 9:31 am  


आपके स्वस्थ्य के बारे में जानकार चिंता हुई ,

मगर वैकल्पिक चिकित्सा बेहतर, विश्वसनीय और प्रभावी है बशते चिकित्सक व्यापारी न हो यह सज्जन तो मंजे हुए व्यापारी लगते हैं !

ऐसे लोग वैकल्पिक चिकित्सा से लोगों का विश्वास हटा देते हैं ! इन नीम हकीमों की जांच होनी चाहिए !

आप स्वस्थ हो जायेंगे इस ब्रह्मवाक्य को रोज याद रखियेगा ! बाकी बाते मिलने पर ....

अफ़सोस है कि यहाँ भी लोग आपके थैले के चक्कर में हैं.... :-))

शुभकामनायें !!

Vaneet Nagpal 24 अगस्त 2011 9:49 pm  

अविनाश जी,
नमस्कार,
आपके ब्लॉग को "सिटी जलालाबाद डाट ब्लॉगसपाट डाट काम" के "हिंदी ब्लॉग लिस्ट पेज" पर लिंक किया जा रहा है|

शिखा कौशिक 24 अगस्त 2011 11:24 pm  

sabhi salah mil chuki hain aage se apne swasthay ke sath kisi aur ko khilvad n karne den .

BHARTIY NARI

Rakesh Kumar 28 अगस्त 2011 11:40 pm  

आपकी सेहत के बारे में भगवान से प्रार्थना करता हूँ.

सबसे पहले आप तन,मन और बुद्धि से स्वस्थता प्राप्त करे.प्रतिशोध को अभी आप इतना स्थगित रख लीजियेगा कि आपकी सेहत पर कदापि भी दुष्प्रभाव न हो.शांत मन से कार्यवाही होगी तो सही और सफल होगी.

कार्यवाही में पुलिस में एफ .आई.आर.,कंज्यूमर फोरम और सिविल कोर्ट विकल्प है.जिसमें यदि पुलिस की सही कार्यवाही हो तो सबसे त्वरित समाधान हो सकता है.कंज्यूमर फोरम में आपको
आपके दिए रूपये, हर्जा खर्चा और मेंटल हरसमेंट का कंपनसेशन भी मिल सकता है.इसके लिए आप उस डॉ. को लीगल नोटिस दीजियेगा.

मीनाक्षी 12 सितम्बर 2011 12:58 am  

आपकी आपबीती पढ़कर तो बस यही दुआ है कि आपको सही डॉक्टर और सही इलाज मिले...आप जल्दी स्वस्थ हों..

नुक्‍कड़ 27 जनवरी 2012 12:10 pm  

पहले दो तीन महीने वाले मंगोलपुरी थाने से फोन आता रहा है कि डॉक्‍टर का पता व फोन नंबर बतलायें क्‍योंकि पुलिस कमिश्‍नर के कार्यालय से शिकायत मिली है।
अब पिछले तीन दिन से मौर्य एनक्‍लेव पुलिस थाने से फोन आ रहा है। उन्‍होंने भी डॉक्‍टर का पता व फोन नंबर लिया है और उनसे बात करके अब वे मुझसे बात करना चाह रहे हैं लेकिन मिलकर। जबकि मेरा स्‍वास्‍थ्‍य ऐसा नहीं है कि मैं तीन से चार घंटे के लिए घर से दूर रह सकूं। चिकित्‍सा चल रही है।

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