अंगूठा हूं मैं एक / ऊंगलियां चार / मिले सब हथेली हो गई तैयार / दसों से करता हूं कीबोर्ड पर वार / कीबोर्ड ही है अब मेरे लिखने का हथियार जब बांध लिया तो बन गया मुक्‍का / सकल जग की ताकत है अब चिट्ठा।

आज हरिभूमि में साल का अंतिम प्रकाशित व्‍यंग्‍य : हाय ! प्‍याजो की जवानी

>> शुक्रवार, 31 दिसम्बर 2010

मेरी बोल्‍ड जवानी

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