अंगूठा हूं मैं एक / ऊंगलियां चार / मिले सब हथेली हो गई तैयार / दसों से करता हूं कीबोर्ड पर वार / कीबोर्ड ही है अब मेरे लिखने का हथियार जब बांध लिया तो बन गया मुक्‍का / सकल जग की ताकत है अब चिट्ठा।

ओबामा ने ऊंट-घोड़ों को खुश कर दिया

>> शनिवार, 27 नवम्बर 2010

http://www.webmilap.com/index.php/hindi-editorial

6 टिप्पणियाँ:

Tausif Hindustani 27 नवम्बर 2010 12:35 pm  

क्या करने चले अविनाश जी अपना मन तो हिंदुस्तान में ही लगता है
http://dabirnews.blogspot.com

सतीश सक्सेना 27 नवम्बर 2010 1:44 pm  

बढ़िया है ...
कुत्तों पर आपने भी लिखना शुरू कर दिया ...दिल्ली के कुत्ते आपके लौटने का इंतज़ार कर रहे हैं ! जरा देख के ..

सोमेश सक्सेना 27 नवम्बर 2010 2:59 pm  

अविनाश जी आपका लिखा अक्सर पढ़ता हूँ हालाँ के टिप्पणी प्रथम बार ही कर रहा हूँ। आपकी शैली पसंद है मुझे।

यदि आप अन्यथा न लें तो एक बात कहना चाहता हूँ,- आप विभिन्न ब्लॉग्स पर जो टिप्पणियां करते हैं कृपया उनमे अपने पोस्ट्स की लिंक देना बंद कर दें। यह अपने आपको प्रचारित करने जैसा लगता है और ऐसा लगता है जैसे आपका मुख्य उद्देश्य अपने लिंक्स ही देना हो और टिप्पणी करना गौण हो। (ऐसा इसलिए क्योंकि आप एक साथ 4-5 लिंक्स देते हैं) कोई नया या नौसीखिया ब्लॉगर ऐसा करे तो फिर भी कारण समझ आता है। पर आप जैसे वरिष्ठ ब्लॉगर को यह शोभा नहीं देता क्योंकि आपको तो वैसे ही लोग पढ़ते हैं।

मैने जो महसूस किया सो कह दिया। आपको बुरा लगा हो तो क्षमा चाहता हूँ।

अशोक बजाज 27 नवम्बर 2010 11:43 pm  

ओबामा की भारत यात्रा सुन्दर आलेख , बधाई .

प्रवीण पाण्डेय 28 नवम्बर 2010 8:14 am  

भारत के जमीनी सत्य से जुड़ गये ओबामा भी।

गुड्डोदादी 30 नवम्बर 2010 11:47 am  

अविनाश सुपुत्र
आशीर्वाद
हम भारतीय कहीं भी रहें विदेशों में
अपनी संस्कृति,मिटटी की सोंधी सुगंध ,देसी खाना ,सरसों का साग ,मक्का की रोटी कहीं नहीं
भले ही ४० वर्षों से हूँ स्वदादिष्ट भोजन अपने ही भारत भू

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