अंगूठा हूं मैं एक / ऊंगलियां चार/मिले सब हथेली हो गई तैयार /दसों से करता हूं कीबोर्ड पर वार / कीबोर्ड ही है अब मेरे लिखने का हथियारजब बांध लिया तो बन गया मुक्का / सकल जग की ताकत है अब चिट्ठा।
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अविनाश जी आपका लिखा अक्सर पढ़ता हूँ हालाँ के टिप्पणी प्रथम बार ही कर रहा हूँ। आपकी शैली पसंद है मुझे।
यदि आप अन्यथा न लें तो एक बात कहना चाहता हूँ,- आप विभिन्न ब्लॉग्स पर जो टिप्पणियां करते हैं कृपया उनमे अपने पोस्ट्स की लिंक देना बंद कर दें। यह अपने आपको प्रचारित करने जैसा लगता है और ऐसा लगता है जैसे आपका मुख्य उद्देश्य अपने लिंक्स ही देना हो और टिप्पणी करना गौण हो। (ऐसा इसलिए क्योंकि आप एक साथ 4-5 लिंक्स देते हैं) कोई नया या नौसीखिया ब्लॉगर ऐसा करे तो फिर भी कारण समझ आता है। पर आप जैसे वरिष्ठ ब्लॉगर को यह शोभा नहीं देता क्योंकि आपको तो वैसे ही लोग पढ़ते हैं।
मैने जो महसूस किया सो कह दिया। आपको बुरा लगा हो तो क्षमा चाहता हूँ।
अविनाश सुपुत्र आशीर्वाद हम भारतीय कहीं भी रहें विदेशों में अपनी संस्कृति,मिटटी की सोंधी सुगंध ,देसी खाना ,सरसों का साग ,मक्का की रोटी कहीं नहीं भले ही ४० वर्षों से हूँ स्वदादिष्ट भोजन अपने ही भारत भू
6 टिप्पणियाँ:
क्या करने चले अविनाश जी अपना मन तो हिंदुस्तान में ही लगता है
http://dabirnews.blogspot.com
बढ़िया है ...
कुत्तों पर आपने भी लिखना शुरू कर दिया ...दिल्ली के कुत्ते आपके लौटने का इंतज़ार कर रहे हैं ! जरा देख के ..
अविनाश जी आपका लिखा अक्सर पढ़ता हूँ हालाँ के टिप्पणी प्रथम बार ही कर रहा हूँ। आपकी शैली पसंद है मुझे।
यदि आप अन्यथा न लें तो एक बात कहना चाहता हूँ,- आप विभिन्न ब्लॉग्स पर जो टिप्पणियां करते हैं कृपया उनमे अपने पोस्ट्स की लिंक देना बंद कर दें। यह अपने आपको प्रचारित करने जैसा लगता है और ऐसा लगता है जैसे आपका मुख्य उद्देश्य अपने लिंक्स ही देना हो और टिप्पणी करना गौण हो। (ऐसा इसलिए क्योंकि आप एक साथ 4-5 लिंक्स देते हैं) कोई नया या नौसीखिया ब्लॉगर ऐसा करे तो फिर भी कारण समझ आता है। पर आप जैसे वरिष्ठ ब्लॉगर को यह शोभा नहीं देता क्योंकि आपको तो वैसे ही लोग पढ़ते हैं।
मैने जो महसूस किया सो कह दिया। आपको बुरा लगा हो तो क्षमा चाहता हूँ।
ओबामा की भारत यात्रा सुन्दर आलेख , बधाई .
भारत के जमीनी सत्य से जुड़ गये ओबामा भी।
अविनाश सुपुत्र
आशीर्वाद
हम भारतीय कहीं भी रहें विदेशों में
अपनी संस्कृति,मिटटी की सोंधी सुगंध ,देसी खाना ,सरसों का साग ,मक्का की रोटी कहीं नहीं
भले ही ४० वर्षों से हूँ स्वदादिष्ट भोजन अपने ही भारत भू
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