अंगूठा हूं मैं एक / ऊंगलियां चार/मिले सब हथेली हो गई तैयार /दसों से करता हूं कीबोर्ड पर वार / कीबोर्ड ही है अब मेरे लिखने का हथियारजब बांध लिया तो बन गया मुक्का / सकल जग की ताकत है अब चिट्ठा।
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6 टिप्पणियाँ:
haha.. maza aa gaya..
anguthe aur anguli ke upar itna vichaar to kabhi bhi nahin kiya tha..
kaafi rochak raha..
aabhaar
अब हम तो अमिताभ की आवाज में ऐसे खोये कि अंगूठे राजा दिखे ही नहीं। अंगुली हो या अंगुठा दोनों के बिना जीवन अधूरा है फ़िर काहे का झगड़ा
दो अँगूठे सिर्फ उन्हीं के पास बचे हैं जिन्होंने,(गुरु) दक्षिणा नहीं दी।
सुन्दर विवेचना।
सूक्ष्म अवलोकन ...अच्छी प्रस्तुति
अमिताभ से पहले आप याद आ जायेंगे इस व्यंग्य के साथ.
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