भ्रष्ट गुब्बारा दबंग हो गया : हरिभूमि में पढि़ए
>> शुक्रवार, 1 अक्तूबर 2010
भ्रष्ट गुब्बारा दबंग हो गया
मूसलाधार बरसात और सेंसेक्स की जुगलबंदी जम रही है। सबको इसका अहसास नहीं है। बरसात की काली काली घटाएं आजकल सुहानी नहीं लग रही हैं जबकि सेंसेक्स की चढ़ाई, उसका बीस हजारी होना, रूहानी लग रहा है। सेंसेक्स के इस कॉमनगेम के लिए न तो स्टेडियम बनाए जाते हैं, न फ्लाई ओवरों का निर्माण किया जाता है, न ही खिलाडि़यों के रहने-ठहरने के लिए पूरे के पूरे खेलगांव बसाए जाते हैं।
आजकल सब अपने कंप्यूटरों-लैपटापों पर पैसा कमाने-गंवाने की हवस की पूर्ति-आपूर्ति में निमग्न रहते हैं। देश विकास की सीढि़या कई बार महंगाई से धीमी और कई बार तेज गति से दौड़ दौड़ कर चढ़ने में लगनपूर्वक जुटा रहता है। इस दौड़ पर चढ़ने के लिए न तो घोड़ों की उपलब्धता होती है और नही कारों की जरूरत इसलिए इसका प्रतीक भी बुल है, जो बुलबुल नहीं है।सेंसेक्स में अक्सर गबनगेम्स होते हैं और सेंसेक्स धड़ाम से गिरने की खूब आवाजें आती हैं। मीडिया में हल्ला और चिल्लाहट का संगम होता है। यह हल्ला सेंसेक्स के भरोसे रहता है। जो मजा सेंसेक्स के गेम में आता है, बिल्कुल वही मजा, बल्कि उससे अधिक मजा आज कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों के नाम पर आ रहा है। सेंसेक्स के गेम में नोट न आने का जोखिम है जबकि यहां पर नोट इतने हैं कि इन्हें छिपाने का जोखिम है।
गेम्स की ओपनिंग के लिए लगाया गुब्बारा भ्रष्टाचार की विकरालता का जीवंत प्रतीक है, जो शेरा के मानिंद एकदम निडर है। गुब्बारे के भीतर क्या है, यह पता जांच के समय भी लापता रहता है। गैसीय हवाओं में यही करामात होती है। भ्रष्टाचार की जांच करने पर भी सब मालूम-नामालूम रहता है। इस गुब्बारे के चयन के लिए हम वाह वाह करते हैं।
नेहरू स्टेडियम पर तैनात गुब्बारा पूछ रहा है कि बतलाओ, मैं बड़ा हूं या भ्रष्टाचार। सब मिल जुल कर करो विचार। जैसे गुब्बारे की हवा निकलती है वैसे भ्रष्टाचार की तो नहीं। सिर्फ सेंसेक्स की ही निकलती है। सेंसेक्स की मिसाल वाहन के टायर से दी जा सकती है जिसमें एक अंतराल पर हवा भरवानी पड़ती है, नहीं तो टायर बदमाशियत पर उतर आता है। सेंसेक्स को टायर मानना उचित है क्योंकि वो पेंचर भी होता है और कई बार ज्यादा हवा भर भर जाने पर फूटता भी है। जिनका ध्यान फूटने से विचलित होता है, वे सब लुट जाते हैं।
आजकल सेंसेक्स दंबग हो रहा है। फिल्म दंबग हो रही है। झडू बाम दबंग हो रहा है। मलाइका बाम हो रही है। झंडू हो रही है। सब आपस में इतना घुल मिल गए हैं, सो पता नहीं चल पा रहा है कि भ्रष्टाचार हो रहा है, गुब्बारा हो रहा है या दबंग हो रहा है।




7 टिप्पणियाँ:
बढ़िया प्रस्तुति...
अब हिंदी ब्लागजगत भी हैकरों की जद में .... निदान सुझाए.....
बेहतरीन प्रस्तुति ।
सही कह रहे हैं…………दबंगो का ही बोलबाला है।
पर गुब्बारे में कितना भ्रष्टाचार छिपा है।
अरे भैया सब गोल-मोल हो रहा है...अच्छा लगा व्यग्य पढ़कर जी।
दंबग जनता को दबंग ही भाति है तभी तो ऎसी बकवास हिट हो जाती है, अब आप ने गुब्बारा भी बता दिया दंबग है जी गुब्बारा भी
सही समय पर सटीक पोस्ट!
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