अंगूठा हूं मैं एक / ऊंगलियां चार / मिले सब हथेली हो गई तैयार / दसों से करता हूं कीबोर्ड पर वार / कीबोर्ड ही है अब मेरे लिखने का हथियार जब बांध लिया तो बन गया मुक्‍का / सकल जग की ताकत है अब चिट्ठा।

कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स के अवसर पर चूहे से चैट : डीएलए में पढि़ए

>> बुधवार, 21 जुलाई 2010

परसों यह समाचार नवभारत टाइम्‍स दैनिक में प्रकाशित हुआ था। व्‍यंग्‍य पढ़ने के लिए ऊपर दी गई इमेज पर क्लिक कीजिए।

18 टिप्पणियाँ:

shashisinghal 21 जुलाई 2010 5:40 pm  

वाह ! मज आ गया चूहे से चेट व्यंग्य पढ़कर । हमारे सरकारी तंत्र में पूरी तरह रचे - बसे भ्रष्टचार पर क्या खूब कटाक्ष किया गया है । एक ही सांस मे पढ़ा जाने वाला उम्दा व्यंग्य है ।

अशोक कुमार पाण्डेय 21 जुलाई 2010 9:04 pm  

धारदार

Arvind Mishra 21 जुलाई 2010 9:13 pm  

बढियां !

गिरीश बिल्लोरे 21 जुलाई 2010 9:15 pm  

सन्पूर्ण व्यवस्था ऐसी है ही. भ्रष्टा फ़ल का अचार जिसे भी मौका मिलता है चाट ही लेता है
ईमानदार वही जिसे मौका नही मिला

neeshoo 21 जुलाई 2010 10:00 pm  

bas ek shabd .......lajawab.....baki jiss taiyari ke liye 900 karor diye gaye the ab wah ab 9000 tak pahuch jaye to phir baat hi kya hai .......ab dekhna hai kya kya hota?

संगीता पुरी 21 जुलाई 2010 11:13 pm  

बहुत सही कह रहे हैं चूहे !!

राज भाटिय़ा 22 जुलाई 2010 1:55 am  

मजे दार जी बहुत सुंदर.
धन्यवाद

honesty project democracy 22 जुलाई 2010 10:29 am  

ये कोमनवेल्थ गेम चूहे पकरने का ही तो सारा खेल है और इसी खेल में 1700 कड़ोर खर्च कर दिए गए ,बाकि का विकाश तो दिल्ली वालों के सामने है | अच्छी प्रस्तुती ...

Tafribaz 22 जुलाई 2010 12:09 pm  

बढियां !

Tafribaz 22 जुलाई 2010 12:09 pm  

बढियां !

Tafribaz 22 जुलाई 2010 12:09 pm  

बढियां !

Tafribaz 22 जुलाई 2010 12:09 pm  

बढियां !

Tafribaz 22 जुलाई 2010 12:09 pm  

बढियां !

Tafribaz 22 जुलाई 2010 12:09 pm  

बढियां !

Tafribaz 22 जुलाई 2010 12:10 pm  

बढियां !

Tafribaz 22 जुलाई 2010 12:10 pm  

बढियां !

नरेन्द्र व्यास 22 जुलाई 2010 12:37 pm  

वाह अविनाश सर...! क्या कस के तमाचा मारा है...! इन चूहों ने पानी में तैरने की कला को भी ईजाद कर लिया है..बिलकुल इम्पोर्टेड घड़ियों की तरह 'वाटर प्रूफ' तकनीक से लेस हैं. साथ ही आपका तमाचा उन चेमिस्ट्स की नकली दवाइयों से ज्यादा असरकारक है..बहुत अच्छा लगा पढकर..आपका बहुत आभार !

सुशील कुमार छौक्कर 23 जुलाई 2010 5:20 pm  

:) :)

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