गर महात्मा गांधी जी ने हिन्दी ब्लॉग बनाया होता ? (अविनाश वाचस्पति)
>> शुक्रवार, 2 अक्तूबर 2009
ब्लॉगर बंधुओं/बांधवियों सभी को नमन।
आज गांधी जयंती है।
चलिए कुछ गांधी चिंतन करते हैं।
मान लीजिए
जो हिन्दी ब्लॉगिंग अब शुरू हुई है
मतलब अब से कुछ बरस पहले।
तब शुरू हो गई होती जब गांधी जी
नोटों पर नहीं इसी धरती पर रहे।
अगर वे अपना ब्लॉग बनाते तो
उसका क्या नाम रखते ?
वे कितने ब्लॉग बनाते ?
उन पर किसका चित्र लगाते ?
ब्लॉग का मूल मंत्र क्या होता ?
क्या वे ब्लॉग पर भी सत्य के प्रयोग करते ?
उनका ब्लॉग ब्लॉगवाणी, चिट्ठाजगत इत्यादि एग्रीग्रेटर्स से जुड़ता ?
अगर जुड़ता तो क्या उन्हें सर्वाधिक पसंद मिलतीं ?
सर्वाधिक टिप्पणियां मिलतीं ?
उनका ब्लॉग सर्वाधिक पढ़ा जाता ?
और उनके तीनों बंदरों पर भी कहें
इस संबंध में चुप न रहें ?
उनका ब्लॉग अमिताभ बच्चन, लालू यादव, आमिर खान ,
शाहरूख खान, मनोज बाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी
इत्यादि से अधिक लोकप्रिय होता ?
क्या उनकी पोस्टों पर भी विवाद होते ?
या सिर्फ स्वस्थ संवाद होते ?
इसी सर्वेक्षण में आई टिप्पणियों से तय हो पायेगा कि क्या महात्मा गांधीजी की प्रासंगिकता आज भी है या बिना उनके हिन्दी ब्लॉगिंग मजे में है या उनके होने से मजेदार होती और समाज को सार्थकता की ओर प्रेरित करती।
आज (सृजनगाथा) श्री जयप्रकाश मानस जी का भी जन्मदिन है उन्हें भरपूर बधाई।




31 टिप्पणियाँ:
गांधी जी अपने ब्लांग पर नेहरू का एक नही दसॊ चित्र लगाते, मेरी टिपण्णी उन्हे कभी नही मिलती, क्यो कि मै सुभाष चन्द्र, भगत सिंह , ओर मै लाल बहादुर शास्त्री जी को टिपण्णी देता,इन्हे नमन करता,सरदार पटेल के पद चिन्हो पर चलता.
धन्यवाद
गांधी जी होते तो कम से कम उन ब्लॉग्स के खिलाफ कोई आंदोलन जरूर इनीशिएट करते जिन्होंने गंदगी फैला रखी है।
गांधी जी अगर ब्लाग बनाते तो कांग्रेस के सभी नेता उस पर टिप्पणी करते और पंसद करते.
गांधी जयंति पर और शास्त्री जी के जन्मदिन पर उन्हे श्रद्दा सुमन
अविनाश भाई, गांधी जी के ब्लॉग का मेरे हिसाब से नाम होता...कोई तो खरीदो...कोई तो खरीदो, गांधी के मूल्यों को, सत्य के अनुभव को, अहिंसा के अलख को...अगर गांधी को अपने दिल मे उतार लोगे तो फिर तुम्हें बापू के आदमकद चित्र लगाने की ज़रूरत ही नहीं रह जाएगी...गांधी की आत्मा सिर्फ बुतों में ही सिमट कर नहीं रह जाएगी...
अगर गाँधी जी का ब्लॉग होता तो:
मेरे हिसाब से तो जैसा अब तक जाना है, पढ़ा है, उसके मुताबिक तो उस ब्लॉग पर टिप्पणी का ऑप्शन ही नहीं होता, सिर्फ सुनो.
कहीं भी विवाद होता, वो आमरण अनशन पर बैठकर न लिखने का उपवास करते-आज के हालातों में तो लगातार उपवास पर ही होते, कुछ लिखने का मौका ही नहीं आता. सेटेलमेंट एक्सपर्ट शुक्ल जी अब तक सेटेलमेंट में उन्हें फ्रूट जूस पिला पिला कर अपना दिवाला पिटवा चुके होते.
सबसे बड़ी बात जो आज के देखने को मिलती वो यह कि पाबला जी सुबह सुबह घोषित करते कि आज गाँधी जी जन्म दिन है और सब बिना जान पहचाने भी वहाँ टिप्पणी रुप में बधाई/शुभकामनाएँ दे रहे होते जितनी की आज भारत में एक्च्यूल में नहीं मिल पा रही हैं उन्हें.
विवादों के चलते अब तक अति संवेदनशील गाँधी जी का स्थाई पता:
मो.क. गाँधी
टंकी के ऊपर
ब्लॉगजगत
हो गया होता.
-सत्य के प्रयोग वह बेनामी होकर छापते और कुछ पोस्टों के कारण अब तक उनके ब्लॉग को बैन करने की मांग उठ गई होती और R रेटेड कर दिया होता.
-आज आपके पास पोस्ट लिखने का मैटर न होता, बस टपते रहते. :)
ब्लॉगिंग अगर गान्धीजी के समय शुरू हो गई होती तो आज जैसी तो कतई नही होती , वह सत्य का आग्रह लिये होती , सादा जीवन उच्च विचार उसका मूल मंत्र होता वह इतनी कलरफुल न होती , कोई एग्रीगेटर भी नही होता , पसन्द नापसन्द की मज़बूरी न होती , लोग सच्ची टिप्पणिया करते ,अछूतोद्धार,आज़ादी,आन्दोलन,अफ्रीका,जैसे गम्भीर विषय होते , भुजाएँ फडक उठे ऐसी कवितायें होती ,स्वदेशी वस्तुओं के लिये आग्रह होता .. बस ऐसी ही विशेषतायें लिये होता "बापू का ब्लॉग" सबसे बड़ा बी तो उस समय बापू ही था ।
गाँधी जी ने ब्लॉग बनाया होता तो नेहरू और पटेल जी को सदा टिपियाते पाया होता...
गाधी जी के ब्लाग का हाल ब्लोग वाणी की तरह हो जाता इतना तिप्पियाये जाते की ब्लोग बंद करना पढ़ जाता ज्यादातर कहा जाता बेवकूफ हैं उल्लू हैं
अरे कौन कहता है कि गांधी जी का ब्लॉग नही है.
अरे भाई!
उनका ब्लॉग है, मगर वो केवल नेहरू जी और मियाँ
जिन्ना साहब को ही दिखलाई देता है।
आडवानी जी और जसवन्त सिंह ने इस ब्लॉग पर
टिप्पणी करने की अनाधिकार चेष्टा की थी।
बेचारे अऩ्जाम भुगत रहे हैं।
गांधी जी के नाम पर पोस्ट हिट करने का टोटका अच्छी बात नहीं है। समीरलाल की टिप्पणी न होती तो बोर ही हो गये होते और लाहौलविलाकूबत कहकर बिना टिपियाये वापस हो लिये होते।
कौन कहता है कि गाँधीजी का ब्लाग नहीं था। पहले इन्टरनेट नहीं था लेकिन समाचार पत्र तो थे। वे अपनी बात को अपने निजी सहायक श्रीमान महादेव जी से प्रतिदिन लिखवाते थे और प्रतिदिन ही उन्हें वितरित करवाते थे। एक बार का वाकया है कि गाँधीजी रेल यात्रा कर रहे थे, महादेव भाई को पत्र लिखने का समय नहीं मिल रहा था। उन्होंने गाँधीजी को सुलाया और बत्ती बन्द कर दी, फिर वे टायलेट की लाइट में बैठकर पत्र लिखते रहे और अगले स्टेशन पर उसे भेजने की व्यवस्था की। इसी प्रकार जब गाँधीजी चम्पारण में थे तब वहाँ पोस्ट ऑफिस नहीं था। महादेव भाई प्रतिदिन कई मील पैदल जाकर उनकी डाक लाते थे। इस कारण वे बीमार भी पड़े और इसी कमजोरी की वजह से बाद में उनकी मृत्यु भी हुई। इसलिए आज यदि गाँधी होते तो वे अपने प्रचार के लिए वे सबकुछ करते जो एक राजनेता करता है।
Dr. Smt. ajit gupta जी से पूरी तरह सहमत। गान्धी जी इस मामले में बड़े 'वस्ताद' थे।
जयप्रकाश मानस जी को जन्मदिन पर हृदय की अथाह गहराईयों से मंगलकामनायें।
गांधीजी किसी और के ब्लॉग पर टिपियाते नहीं तो उनके पर भी कोई नहीं टिपियाता. हाँ इस काम के लिए आदमी रखते तो फिर अलग बात है :)
(अविनाश जी, गांधी जी के ब्लॉग की भाषा हिन्दी न होकर उन्हीं की ईजाद की गई, बादशाह राम और बेगम सीता वाली, हिन्दुस्तानी होती।
उन्होंने राम को बादशाह और सीता को बेगम तो बना दिया पर हजरत मोहम्मद को कभी श्रीमान मोहम्मद नहीं बना पाए ठीक वैसे ही जैसे मन्दिरों में कुरान का पाठ करवा दिया पर किसी मस्जिद में कभी गीता या रामायण का पाठ नहीं करवा सके।)
गांधी जी अगर अपना ब्लॉग बनाते तोः
क्या नाम रखते?
नाम रखते "यंग इंडिया उर्फ हिन्दुस्तान", भारतवर्ष या भारत नाम रखने की तो सोचते भी नहीं।
कितने ब्लॉग बनाते?
सिर्फ एक ही ब्लॉग बनाते पर अलग अलग कैटेगरी अवश्य रखते जैसे कि "हरिजन खुश", "मुस्लिम खुश" याने कि कांग्रेस का वोट बैंक खुश।
किसका चित्र लगाते?
जिस चित्र को मुसलमान पसंद करें।
(सन्दर्भः "वन्देमातरम" को मुसलमान पसंद नहीं करते थे इसलिए हठपूर्वक "जनगणमन .." को राष्ट्रगीत बनवा दिया।)
मूलमंत्र क्या होता?
मुस्लिम तुष्टिकरण!
क्या ब्लॉग पर सत्य के प्रयोग करते?
क्यों नहीं करते, सत्य, ब्रह्मचर्य आदि के प्रयोगों ने ही तो उन्हें लोकप्रियता दिलाई थी।
(वैसे यह अलग बात है कि सत्य और ब्रह्मचर्य के प्रयोग नहीं होते बल्कि साधना होती है पर गांधी जी साधना में नहीं प्रयोग में विश्वास किया करते थे।)
एग्रीगेटर्स से जुड़ते?
जरूर जुड़ते, नहीं तो पब्लिसिटी कैसे मिलती? और अनशन करके अपने ब्लॉग के सिवा सारे ब्लॉग्स को एग्रीगेटर्स से निकलवा देते।
सर्वाधिक पसंद मिलती?
अनशन करके पसंद बटन खत्म करवा देते और अपने ब्लॉग को सर्वाधिक पसंद डिक्लेयर कर देते।
सर्वाधिक टिप्पणियाँ मिलतीं?
टिप्पणी के मामले में समीरलाल जी की टिप्पणी से पूर्णतः सहमत।
सर्वाधिक पढ़ा जाता?
यदि सर्वाधिक नहीं पढ़ा जाता तो अनशन और उपवास कर के जबरदस्ती पढ़वाया जाता।
तीन बंदरों के बारे में ...
अब बंदरों के बारे में क्या कहें? बंदरबाँट करके दिखा तो दिया।
पोस्टों पर विवाद होते या स्वस्थ संवाद?
विवाद होने के पहले ही दबा दिया जाता। हर पोस्ट को स्वस्थ संवाद ही माना जाता।
क्या पता आज की राजनीति का शिकार वो भी होते और उनके विचारों को कॉपी करके और ब्लॉग बन जाते अब वो तो ठहरे अहिंसा की पुजारी किसी को कुछ कहते नही..वैसे दुनिया को बहुत और अच्छी जानकारी ज़रूर मिल जाती महात्मा गाँधी जी के ब्लॉग से..
बढ़िया कल्पना प्रस्तुत किया..बधाई
गांधीजी का ब्लॉग होता तो उसे पढ़ता कौन? सत्ताधारी दल गांधी ब्लॉग पढ़ने पर अघोषित पाबंदी लगा देता. इस ब्लॉग को पढ़ने और उन पर कमेन्ट देने वाले लोगों की खुफिया रपट शासन को भेजी जाती और इन लोगों के खिलाफ देशद्रोह, आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता एवं यदि सम्भव होता तो अश्लील साहित्य परोसने के मामले में मुकदमा दर्ज हो जाता. गांधीजी का कंप्यूटर जब्त कर लिया जाता इन्टरनेट सुविधा प्रदाता कंपनी उन्हें उस राशि का बिल थमाती जिसे चुकाना उनके बस से बाहर होता.
आपके ब्लॉग पर पहली बार आया हूँ, हालांकि अलका जी कई बार मुझे आपको पढ़ने को कह चुकी थीं, मैं ही गफलत में था. क्षमा चाहूँगा, अब तो आना जाना लगा रहेगा.
तो उस ब्लोग का नाम होता....बापू और सर्किट की.....मानसिक हलचल....
aaj ke din Gandhiji ke bare main apne blogger bandhuo ke vichar sun dil vyathit hua..
समीर भाई को मैंनें टिप्पणी करने का जो मैटर दिया था,
लगता है कुछ हिस्सा आपने मॉडरेट कर दिया है ।
अरे आपको जरा भी ख़्याल न आया कि आज लोग किनके नाम पर राजनीति करते ।
वह अब तक लिखो या टीपो के कई आँदोलन चला चुके होते !
बस इतना ही कहना है ....अच्छा हुआ जो वो आज नहीं हैं
गांधीजी खादी, चरखा का प्रचार करते और रमधुन सुनवाते।
गांधीजी ब्लोग पर होते तो यकीन मानिये हमें श्री राम के सन्दर्भ में अत्यधिक चर्चा प्राप्त होती। उनके आध्यात्म, दर्शन आदि का लाभ मिलता।
और हां खादी का प्रचार ज्यादा पुख्ता हो जाता।
Aapke prashn ko sunkar to khud Gandhi bhi soch me pad jate.
गांधी जी का ब्लाग होता तो सरकार उसे ही सरकारी आदेश मानकर कार्य करती। कोई भी आयुध कारखाने नहीं होते। हवाई जहाज होते किन्तु लड़ाकू विमान नही होते। पानी के जहाज होते किन्तु पनडुब्बियां नहीं होती। 26 जनवरी को गणत्रत परेड नहीं होती, तिरंगा झण्डा फहरता। शायद चीन 1962 का हमला .............................। शायद पकिस्तान .....................।
avinaash ji
namaskar
bahuty dino ke baad blogging me aaya hoon .
bahut saarthak churcha....
gandhiji bhi tippani game ka shikaar ho jaate ..
is post ke liye meri badhai sweekar kare..
regards
vijay
www.poemsofvijay.blogspot.com
आप यहां भी आयें और इसे भी पढ़ें। सभी का स्वागत है http://nukkadh.blogspot.com/2009/10/blog-post_5157.html
अच्छा ही है गाँधी जी आज नहीं हैं.........वर्ना शायद वो भी इसी गन्दी राजनीति के शिकार हो गए होते.
gandhi ji blog banate to apna time hi waste karte quki aaj unko janne wala samjhne wala yaha koi nhi hai. school ki ek book hai itihas jisme ye sab chapa hota hai or baccho ko unka jawab dena hota hai, isko unki majburi bhi keh shkte hai , warna aaj yaha par ese mahnubhwo ki koi ijat nhi hai. wajha humare politicion jo sirf unke janamdin ya marandin par hi yaad karte hai. tv. or radio par usi din desh bhagti geet sunae jate hai movieya dikhai jati hai warna wahi sab.
kehne ko to bahut kuch hai but utna sab yaha likhna muskil hai
सबसे मुख्य बात तो छोड़ ही दी भाई लोगों ने.
वह यह कि गाँधी जी पर नित आरोप लगते कि वे नारीवादी हैं कि नारीविरोधी या नारीभक्त या नारीप्रिय या नारीप्रेमी या नारीशत्रु या नारीटीपक या नारीहन्ता या स्वयं छद्म नारी.
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