अंगूठा हूं मैं एक / ऊंगलियां चार / मिले सब हथेली हो गई तैयार / दसों से करता हूं कीबोर्ड पर वार / कीबोर्ड ही है अब मेरे लिखने का हथियार जब बांध लिया तो बन गया मुक्‍का / सकल जग की ताकत है अब चिट्ठा।

सोपानस्टेप के अक्‍टूबर 2009 अंक में पढि़ए नारदवाणी स्‍तंभ में प्रकाशित चांद पर पानी का मिलना

>> बुधवार, 14 अक्तूबर 2009


माउस से क्लिक करें और मन हो तो पढि़एगा।
अपनी राय ई मेल sopanstep@gmail.com पर भी सीधे भेज सकते हैं।

12 टिप्पणियाँ:

संगीता पुरी 14 अक्तूबर 2009 12:30 pm  

क्लिक कर दिया है .. अब देखती हूं .. मन होता है या नहीं पढने का .. वैसे बधाई !!

अविनाश वाचस्पति 14 अक्तूबर 2009 12:58 pm  

@ संगीता पुरी

धन्‍यवाद क्लिक करने के लिए और यदि मन से पढ़ लें तो सबके लिए अपनी सम्‍मति छोड़ दें कि वे इसे पढ़ें अथवा पढ़ने से बचें

संगीता पुरी 14 अक्तूबर 2009 1:16 pm  

पढकर मैं खुद ही दोबारा टिप्‍पणी करने आ गयी .. तब आपका संदेश देखा .. वाकई बहुत अच्‍छा व्‍यंग्‍य किया है आपने .. अपनी पृथ्‍वी का पर्यावरण बिगाडकर चंद्रमा पर पानी ढूढने निकले हैं लोग .. ज्‍योतिष की पुस्‍तकों में कब से लिखा है कि चंद्रमा में पानी है .. वैसे धंधे की सफलता के लिए आपको शुभकामनाएं !!

Murari Pareek 14 अक्तूबर 2009 1:25 pm  

वाह क्या धांसू आइडिया है चाँद का पानी !!! चन्द्र जल !! रोज पियें और उछल उछल कर जियें !!! ब्रांड चन्द्र का पानी कुवें के अन्दर का < वाह भाई अविनाश जी क्या कहने आपके मस्तिष्क समन्दर का !!

कमल शर्मा 14 अक्तूबर 2009 3:18 pm  

चांद पर पानी धरती का और धरती पर चंद्र का..यह कारोबार करुंगा मैं तो। ताकि दोनों ग्रहों के जीव एक दूसरे के पानी को पी सके और अपनी कमाई चोखी। सीधे चांद से धरती तक की पाइपलाइन डाल दूंगा। इसके अलावा चांद पर पावर प्‍लांट लगाना है। शेयर बाजार खोलना है। वहां रियलटी प्रोजेक्‍ट भी शुरु करना है। आप चलो साथ में ताकि अपन पहले बड़े व्‍यापारी बन जाएं।

राज भाटिय़ा 14 अक्तूबर 2009 3:24 pm  

अरे काहे मेरे पेट पर लात मार रहे हो, मेने तो यह धंधा शुरु भी कर दिया, यानि चांद का पानी ३० रुपये एक बोतल(असल मै पानी तो जोहड से भरा है)
बस एक बार बाजार मै पहुचने दो फ़िर बारे न्यरे जी

HARI SHARMA 14 अक्तूबर 2009 7:07 pm  

अविनाश भाई

इस धन्धे मे़ तो गोरख धन्धे की असीम सम्भावनाये है. चन्द के पानी का केमिकल फ़ोर्मुल लेके बिना वहा जाये लगभग वैसा और रन्ग स्वद मै मिलता पानी बन दो. और देशी माल को बाज़ार मे चान्द के पानी के भाव उतार दो

ऐसे लोग जिनकी चान्द साफ़ दिखती हो उन्हे विक्री अधिकारी बना दो. विश्वसनीय प्रचारक और विक्रेता सावित होन्गे.

जब बाज़ार मे उतरो तो चान्द फ़िज़ा फ़ेम चन्द्रमोहन को उदघाटन के लिये बुला लो. मीदिया वैसे ही पहुच जायेगा

अविनाश वाचस्पति 14 अक्तूबर 2009 7:19 pm  

@ हरि शर्मा


बिक्री अधिकारियों की नियुक्ति आपके द्वारा ही करवाई जाएगी आप तो इसमें भी वारे न्‍यारे कर लेना। पर एक खाता मेरे नाम भी स्विस बैंक में ....


आप ही देखना चांद वालों को लेना है या बेचांद वालों को या अन्‍य किसी को ... मतलब तो पानी बिकने और धंधाजोरों से चलने से है।

विनोद कुमार पांडेय 15 अक्तूबर 2009 10:01 am  

पानी का धंधा तो बहुत बढ़िया रहेगा क्योंकि भारत में अब यही बाकी था की प्रकृति प्रदत्त हवा और जल भी का भी मूल्य लगने लगे..

Mrs. Asha Joglekar 15 अक्तूबर 2009 6:18 pm  

अब एक और ब्रांड मिल गया कॉपी मास्टरों को । अच्छा व्यंग है ।

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी 16 अक्तूबर 2009 12:21 pm  

ab chand ka minral water jald hi milegaa...hai na...

राजीव तनेजा 17 अक्तूबर 2009 10:49 pm  

बहुत-बहुत बधाई

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