अंगूठा हूं मैं एक / ऊंगलियां चार / मिले सब हथेली हो गई तैयार / दसों से करता हूं कीबोर्ड पर वार / कीबोर्ड ही है अब मेरे लिखने का हथियार जब बांध लिया तो बन गया मुक्‍का / सकल जग की ताकत है अब चिट्ठा।

अमिताभ बच्चन हमारे घर आये

>> शनिवार, 15 दिसंबर 2007


(बिग बी (ब्रदर) के 66वें जन्‍मदिन पर पुनर्प्रस्‍तुति)
एक दिन अमिताभ बच्चन हमारे घर आये
घर में अचानक उन्हें देख हम चकराये
अमिताभ भाई ने हमें गले से लगाया
हमको अंदर तक रोमांच हो आया

हम मन ही मन सोच रहे थे
इस रहस्य को टटोल रहे थे
तीर तुक्के उन पर फेंक रहे थे
निशाना न लगने पर झेंप रहे थे

लगता है अमिताभ भाई
करोड़पति तृतीय खेल रहे हैं
पहले फोन पर करते थे बात
अब घर घर डोल रहे हैं

कवि मित्र पवन चंदन प्रतिभागी होंगे
करोड़पति बनने की लाईन में डटे होंगे
डोर ए फ्रेन्ड्स का ऑप्शन चुना होगा
अरबपति बनने का ताना बाना बुना होगा
कौन बनेगा अरबपति ?
अमिताभ बोले नहीं वाचस्पति।

अब तो शाहरूख खेल खिला रहे हैं
चैक पर साईन करने से डर दिखा रहे हैं
करोड़पति बनने के लिए
लोग तो अब भी खूब किस्मत आजमा रहे हैं
शाहरूख गले मिल रहे हैं, जफ्फी पा रहे हैं
टोटके तो किंग खान के भी लोगों को खूब भा रहे हैं

मैंने कहा यह सारी दुनिया जानती है
टीवी ने आपके दीवानों को दीवाना और बनाया है
और तो और शाहरूख भी आपका दीवाना बनने से
नहीं बच पाया है तो बाकियों की क्या बिसात है

अभी तो न जाने किन मुद्दों पर चर्चा चलती
तभी श्रीमतीजी ने चाय के लिये आवाज लगाई
चाय के लिए किया मना और खींच ली पूरी रजाई
पर फिर न तो नींद आई और न ही अमिताभ भाई
बिग बी का साथ छूट गया और हमारा सपना टूट गया।

11 टिप्पणियाँ:

rajivtaneja 15 दिसंबर 2007 को 11:39 pm  

उम्मीद पे दुनिया कायम है...

उम्मीद से दुगना नहीं.... सौ गुना पावें...
आज नहीं कल ..बच्चन जी आपके घर आवें

अविनाश वाचस्पति 15 दिसंबर 2007 को 11:44 pm  

उसी कल के आने का विश्वास है जिस पर सृष्टि कायम है

सचिन लुधियानवी 16 दिसंबर 2007 को 12:17 am  

हमारी भी शुभकामना स्वीकारें. धन्यवाद की अभी कोई जरूरत ही नहीं जब पइसा मिले हमरा हिस्सा तुरतै भिजवावें. पूरा का पूरा न हडप गप्प सप्प कर जावें..... समझ गये न या देशज भाषा में समझावैं

Omprakash 16 दिसंबर 2007 को 12:28 am  

टिप्पणियाने के लिए जो साईनिंग एमाउंट दिया है उसका जिक्र तो करें
आयकर वाले अपना कर आप तक पहुंचा ही लेंगे सचिन जी।

Praveen 16 दिसंबर 2007 को 12:39 am  

जब दोबारा अमिताभ बच्चन या अभिषेक बच्चन या ऐश्वर्या राय बच्चन आपके घर आयें तो पहले से अवश्य बतलायें, हमें उनके साथ चित्र खिंचवाने हैं, उनके आटोग्राफ भी लेने हैं। किसी और मित्र के यहां आयें तो वे भी बतलायें। पूर्व धन्यवाद के साथ। अमिताभ भाई स्वयं इसे पढ़े तो हमसे संपर्क करने की कृपा करें। आखिर उम्मीद पर ही तो सृष्टि कायम है, उसी उम्मीद के नाम .....

मीनाक्षी 16 दिसंबर 2007 को 2:22 am  

सपना अच्छा
कल्पित दुनिया में
सच हो जाए
:)

अविनाश वाचस्पति 16 दिसंबर 2007 को 4:19 am  

त्रिपदम ने दे
दी दस्तक मेरे ब्लॉग
सच है अच्छा

mahashakti 16 दिसंबर 2007 को 10:45 am  

बहुत अच्‍छा लिखा है, साथ ही साथ आपके काव्‍य को पढ़ने मे भी काफी मजा आया

विनीत कुमार 16 दिसंबर 2007 को 1:59 pm  

aapke yaha aayae the, mere yaha to aate hi rahte hai, jaade me boro plus aur diwali me cadbury lekar. abki reid n tailor lekar aayae the, mana kar diya.

अमिताभ बच्चन 16 दिसंबर 2007 को 7:23 pm  

मैं अविनाश वाचस्पति के घर आया था और मुझे आज भी याद है कि उनके घर की चौखट नीची होने के कारण मुझे नीचे होकर उनके घर में प्रवेश मिला था। जो भी चाहें कि मैं उनके घर या सपने में आऊं, वे अपने अपने घरों की चौखटें ऊंची करवा लें अन्यथा मुझे नीचे होकर प्रवेश करना होगा।

ePandit 6 सितंबर 2012 को 5:18 am  

यह सपना अपना सा लगता है।

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