अंगूठा हूं मैं एक / ऊंगलियां चार / मिले सब हथेली हो गई तैयार / दसों से करता हूं कीबोर्ड पर वार / कीबोर्ड ही है अब मेरे लिखने का हथियार जब बांध लिया तो बन गया मुक्‍का / सकल जग की ताकत है अब चिट्ठा।

हेपिटाइटिस सी नामक जानलेवा बीमारी से इश्‍क - अविनाश वाचस्‍पति

>> सोमवार, 11 जनवरी 2016

##जानलेवाबीमारीहेपिटसइटिससी से इश्‍क
लेखक - अविनाश वाचस्‍पति की आत्‍मकथा
भगवतगीता के अध्‍याय
अप्रिय सत्‍य मतलब
सच्‍चे एवं कड़वे अनुभवों पर आधारित।
जिससे 90 प्रतिशत आम लोग
जो पुस्‍तक पढ़ते और सुनते हैं
तथा इंटरनेट सेे जुड़े 10 प्रतिशत
लोगों में से नहीं हैं
हेपिटाइटिस सी से बचाव कर सकें
और जानें इसके दुष्‍परिणाम।

अविनाश वाचस्‍पति
195, पहली मंजिल, सन्‍त नगर, नई दिल्‍ली 110065, भारत














Read more...

शाहरूख पागल हो गया है - कविता - अविनाश वाचस्‍पति

>> शनिवार, 19 दिसंबर 2015



##Dilwale

न बाजी जीती
न है वो राव
वह तो है देखो
शाहरूख खान

कह रहा है
चिल्‍ला रहा है
अखबारों की सुर्खियां
बना हुआ है
शाहरूख पागल हो गया है

तो पहले क्‍या अक्‍लमंद था
बुद्धि का द्वार उसका बंद था
तब भी तो लोग कहेंगे
या लोग कहें कि
शाहरूख पागल हो गया है

मस्‍त मस्‍त मस्‍तानी
पागल हुई जवानी
पैसे की सच्‍ची कहानी
पैसे की है यह मेहरबानी
शाहरूख पागल हो गया है

तो पहले क्‍या रहा है
तब तो पागल नहीं था
न हुआ और न आसार थे
पागल होने के

अब पैसे की ताकत बनी है
इतनी जनता ने कहा है
जनता ही कह रही है
शाहरूख पागल हो गया है

आलोचना सुनकर अपनी
करता है अब लोचन बंद
वह ही तो कहलाता है पागलचंद

यह हर किसी के बस का नहीं है
दिलवाले ही मान सकते हैं
कह सकते हैं खुद को
दे सकते हैं प्रमाण पत्र
शाहरूख पागल हो गया है
कह रहे हैं दिलवाले
होकर उतावले

इससे ही मिलेगी चर्चा
न होगा इसमें खर्चा
जो है वह भी बचेगा
खर्च करके भी इतना
वापिस नहीं मिलेगा
शाहरूख पागल हो गया है
दिलवाले कह रहा है
दिलवाले कह गया है
गया कहां है
यहीं तो घूम रहा है
बुद्धिजीवियों की बस्‍ती में

यह भी एक निशानी है
दिलवाले कह रहा है
शाहरूख पागल हो गया है।

--- अविनाश वाचस्‍पति
9560981946

इस कविता के बारे में अपनी टिप्‍पणी लिखने से डरें नहीं
आखिर डरना एक हिंदी ब्‍लॉगर का काम नहीं है। 

Read more...

कड़ाके की ठंड पढ़ रही हो जहां - कविता - अविनाश वाचस्‍पति

>> गुरुवार, 17 दिसंबर 2015

#‪#‎HardCold‬

कड़ाके की ठंड
पढ़ रही हो जहां
नाम काट दो
उस क्‍लास से
सर्दी भरे दिन रात का।

गला काट रही है
जान से मार रही है
ठिठुरा ठिठुरा कर
गरीबों को और
उनको भी जो
सोते हैं फुटपाथ पर।

बदल दो सारे
फुटपाथों को
ढके हुए नालों में
या बिछा दो
सीमेंट के गोल
बड़े पाइप
सड़को के किनारे।

जो बेघरों के लिए
बन जाएं राहत
न हों वो आहत
सोते रहे वे सदा
सर्दी में और उन्‍हें
हो अहसास
गर्मी में सर्दी का।

ले सकें वे जिससे 
नाक से गर्म सांस
ठंडी सांस से बचें
न छींकते रहें
ठंड कड़ाके की
कढ़ाई न करे सके
सर्दी नाक गले पर उनके।
--- अविनाश वाचस्‍पति

Read more...

छिलके‬ : अविनाश वाचस्‍पति

>> मंगलवार, 8 दिसंबर 2015

सब्जियों और फलों के छिलके पाचनक्रिया के लिए बहुत उपयोगी हैं, इनका उपयोग करें, इन्‍हें न फेकें। जहां तक कि आलू, चुकंदर, मूली, गाजर, केले, सेब, अनार, अमरूद के छिलके भी बेकार नहीं हैं।
मोबाइल 09560981946

Read more...

गुड़ की मिठास भरी डली - अविनाश वाचस्‍पति

>> शनिवार, 5 दिसंबर 2015

सब्जियां हरी तबीयत के लिए भली
लगती हैं गुड़ की मिठास भरी डली।
शरीर की खिल जाती है हरेक कली
जिस्‍मानी ताकत बनाती है बली।
- अविनाश वाचस्‍पति
मोबाइल 9560981946

Read more...

मुखिया बना दिया दुखिया - कविता - अविनाश वाचस्‍पति

>> शनिवार, 28 नवंबर 2015

मेरा जिगर नहीं सुलगता है अब
चाहे सुलगाऊं बीड़ी या सिगरेट
जिगर मेंं नहीं होता है दर्प
ऐसा मर्द हो गया हूं मैं।

दर्पीला मर्द एक दिन मर जाएगा
मगर मालूम नहीं चलेगा किसी को
इस मर्द के जिगर में दर्प
लबालब भरा था।

जिगर को हेपिटाइटिस था
ए, बी, सी, डी अथवा ई
दर्प भी था यह कहा जांच में
लीवर एंड बायलरी की अस्‍वस्‍थता
में चिकित्‍साविदों ने ।

दर्द कितना भी रहा
मर्द बनकर मरीज ने
सब सहा किसी से न कहा
जब परिवार में सबको
पता चल गया
उसके शरीर का
पत्‍ता पत्‍ता हिल गया
कुछ झड़ गये
कुछ पेड़ पर रहे अटके।

थक गया वह बुरी तरह
छोड़ दी उसने नाैकरी
घर के लिए कमाई
करके ला न सका
स्‍वजन उसके खास
विरुद्ध हो गए।

परिवार के निजी रिश्‍तों को
गंदी गालियों से गलियाता रहा
इसमें ही उसका अहम्
तुष्टि पाता रहा
उसका रोग था लाइलाज
दवाई उस तक पहुंच न पाई।

आज जब उसके रोग का
हो गया है निदान
हेपिटाइटिस सी उसके
शरीर में ढूंढे न मिला
वरदान मरीज को
स्‍वजनों को शाप लगा।

मुखिया रहा घर का
वह जीवन भर
अब दुखिया दिया है
बना पत्‍नी, पुत्र और पुत्रवधू ने।

- अविनाश वाचस्‍पति
मोबाइल 9560981946

Read more...

Assurance by Future Generally # Avinash Vachaspati

>> रविवार, 8 नवंबर 2015

##FutureGenerali

आप सबने अविनाश वाचस्‍पति का देखा है बुरा हाल
बीमारी ने क्‍या जकड़ा, सबने उन्‍हें काबू कर लिया पकड़ा
गर होते उनके पास कुछ लाख रुपये
या एश्‍योरेंस यानी इंश्‍योरेंस से प्राप्ति की होती आस
दसियों बीसियों पचासों लाख उनके खाते में होते
या इंश्‍योरेंस से मिलने वाले होते
तो उनकी इतनी बुरी दुर्गत न होती

बीमारी कैंसर, हेपिटाइटिस कभी भी गले लिपट सकती है
आपके बस में नहीं होता है तब नौकरी करना
रिटायरमेंट से पहले नौकरी से वीआरएस ही होता है हल
चाहे उसे मान लें आप किसान का हल
या किसी सवाल का हल
हल तो आखिर हल ही होता है

आप नौकरी करके धन नहीं ला रहे हैं
पर इंश्‍योरेंस के रूप में मिलने वाले धन की आस जगा रहे हैं
आपने स्‍वजन आपको नहीं दुत्‍कारेंगे नहीं तो मेरी तरह पागल बतला देंगे
पत्‍नी, पुत्र और पुत्रवधू
यही तो उनका नारा है
इसी नारे का तो उन्‍हें सहारा है


 - अविनाश वाचस्‍पति, साहित्‍यकार सदन,195,पहली मंजिल, सन्‍त नगर, ईस्‍ट ऑफ कैलाश, नई दिल्‍ली 110065 मोबाइल 08750321868/09560981946

Read more...

  © Blogger template Shiny by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP